“लालू यादव के राज में हम शान से जीते हैं,” रामविलास पासवान के आदर्श ग्राम में एक लालू समर्थक

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सांसद आदर्श ग्राम सुल्तानपुर में जहां पासवान समुदाय के अधिकतर लोग रामविलास पासवान के पक्ष में नजर आ रहे थे, वहीं एक युवा ने लालू प्रसाद यादव के प्रति अपना समर्थन जताया

सरोज कुमार

सुल्तानपुर में 'बड़हम बाबा
सुल्तानपुर में ‘बड़हम बाबा’ (फोटो: सरोज कुमार)

हाजीपुर में पासवान चौक से करीब तीन किलोमीटर दूर सांसद आदर्श ग्राम सुल्तानपुर के प्रवेश द्वार पर ही एक मंदिर है. इसी मंदिर के बाहर चार अन्य मूर्तियां हैं. देखने से लगता है, मानो घोड़े पर सवार सबसे पहली मूर्ति बाकियों का नेतृत्व कर रही है. पूछने पर एक युवा बताता है कि यह ‘बड़हम बाबा’ की मूर्ति है. दरअसल, इस पासवान बहुल गांव में हिंदू मंदिर या देवी-देवताओं के साथ-साथ दलित समुदाय के लोक देवताओं की मूर्तियां भी दिख जाती हैं.

पासवान समुदाय को लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के प्रमुख रामविलास पासवान का मुख्य वोट बैंक माना जाता है. थोड़ी-बहुत नाराजगी के बावजूद यहां के पासवान हालांकि इस लोकसभा चुनाव में भी रामविलास पासवान को ही वोट देने के बात कहते हैं. इसकी वजह वे रामविलास पासवान के विकास कार्यों के साथ-साथ उन्हें उसी जाति का होना बताते हैं. जाति का फैक्टर वहां सबसे अहम नजर आ रहा था. लेकिन गांव में हमें पासवान समुदाय का 23 वर्षीय एक ऐसा शख्स मिला जिसने रामविलास पासवान की बजाए लालू प्रसाद यादव को समर्थन देने की बात कही. चंद्रमोहन नामक इस युवा ने कहा, “लालू यादव के राज में हम शान से जीते हैं. लेकिन नीतीश कुमार के राज में हमें बहुत दिक्कत है.” उससे बातचीत करने के दौरान उसमें बिहार के जदयू-भाजपा सरकार के खिलाफ भारी नाराजगी नजर आई. यह बताते हुए उसके चेहरे पर गुस्सा साफ नजर आ रहा था, “पुलिस हमें यहां बहुत परेशान करती है. हम मेहनत-मजदूर करने वाले हैं, लेकिन पुलिस हमें कभी-कभी बेमतलब पकड़ कर ले जाती है और मारपीट तक करती है. सच पूछिए तो इस सरकार में हम प्रताड़ित हैं.”

इस युवा में यह नाराजगी भी थी कि रामविलास पासवान के पुत्र चिराग पासवान को चुनाव के वक्त ही उनकी याद आती है. जब पूरे गांव के लोग पासवान और सरकार से थोड़ी नाराजगी के बावजूद लोजपा को वोट देने की बात कह रहे थे, इस युवा का आक्रोश और लालू यादव के प्रति समर्थन हैरानी भरा था.

(सरोज कुमार फ्रीलांस पत्रकार हैं तथा फिलहाल जामिया मिल्लिया इस्लामिया से दलित और न्यू मीडिया पर रिसर्च कर रहे हैं.)