यूपी: अब हमीरपुर और कुशीनगर में दलित तो जालौन में दृष्टिबाधित बच्ची के साथ बर्बरता

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अलीगढ़ में ढाई साल की मासूम की हत्या को लेकर जहां लोगों में आक्रोश है, वहीं प्रदेश के हमीरपुर, कुशीनगर और फिर जालौन में बच्चियों की हत्या और बलात्कार के मामले सामने आए हैं.

द मार्जिन टीम

अलीगढ़ में ढाई साल की मासूम की वीभत्स हत्या को लेकर लोगों में काफी आक्रोश है. लेकिन उत्तर प्रदेश में बच्चियों की हत्या और बलात्कार का मामला थमता नजर नहीं आ रहा. 8 जून को हमीरपुर में दलित समुदाय की करीब दस वर्षीय बच्ची का शव झाडियों में बरामद किया गया है. बच्ची के माता-पिता ईंट-भट्टे पर काम करते हैं. 7 जून की रात को जब बच्ची सोई हुई थी तो आरोपियों ने उसका अपहरण कर लिया और कुछ दूर ले जाकर बलात्कार के बाद उसकी हत्या कर दी.

इस मामले के 24 घंटे के भीतर ऐसा ही मामला जालौन के कुठौंद थाना क्षेत्र के एक गांव में सामने आया. यहां 8 जून की शाम को करीब आठ वर्षीय एक बच्ची लापता हो गई. अगले दिन सुबह में उस बच्ची की लाश गांव के बाहर एक पुलिया के पास झाड़ियों में बरामद किया गया. बच्ची के गले में उसकी सलवार का फंदा लपेटा हुआ था. परिजन उसके बलात्कार की भी आशंका जता रहे हैं.

विभिन्न सामाचार रिपोर्ट्स के मुताबिक, बच्ची को आंख से बहुत कम दिखाई देता था और उसका ऑपरेशन किया गया था. लेकिन फिर भी आंख की रोशनी में कोई सुधार नहीं हुआ था. पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें हिरासत में ले लिया है. लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़ित परिवार अपनी बच्ची की हत्या से बेहद डरा हुआ है. जाहिर है, ये हालात उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन की पोल खोल कर रख देते हैं.

यही नहीं, कुशीनगर में पुलिस-प्रशसान पर दलित बच्ची के सामूहिक बलात्कार के बाद रिपोर्ट दर्ज कराने आई उसकी मां को थाने से भगाने के आरोप लग रहे हैं. यहां अहिरौली बाजार थाना क्षेत्र में 6 लोगों के द्वारा 7 जून को एक 13 वर्षीय दलित किशोरी के अपहरण और सामूहिक बलात्कार का मामला सामने आया है. आरोप है कि बच्ची के परिजनों के साथ आरोपियों का नाली को लेकर विवाद था. आरोपी बच्ची को रात में उठा ले गए और गैंगरेप करने के बाद घर के पास बच्ची को फेंक कर भाग गए.

सुबह जब पीड़िता की मां थाने एफआइआर दर्ज कराने गईं तो एसएचओ ने कथित तौर पर उन्हें भगा दिया. बाद में इस मामले के तूल पकड़ने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया. पुलिस के मुताबिक, इस मामले में अब तक चार आरोपियों की गिरफ्तारी कर ली गई है. लेकिन जाहिर है, जिस तरह के प्रदेश में लगातार मासूम बेटियों पर बर्बरता के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, उससे योगी आदित्यनाथ की सरकार और प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.

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