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How Netanyahu negates the Palestinian rights through Iran bashing

Netanyahu presents Iran in a bad light to the world by demonizing Tehran with a smart campaign. Meanwhile, he shifted world attention...

वैश्विक सैन्यीकरण के विरोध में एकजुटता और एकता: कश्मीर पर फिलीस्तीनी संगठन बीएनसी का...

फिलिस्तीन समाज के सबसे बड़े गठजोड़- फिलिस्तीन बॉइकाट, डाइवेस्टमेंट एंड सैंक्शंस नेशनल कमिटी (बीएनसी), ने कश्मीर मसले पर कश्मीरियों के साथ...

India follows Israel’s steps for a demographic change in Kashmir

Palestine and Kashmir– similar story and sadness. A Palestinian calls India's decision to revoke Articles 370 and 35-A of the Indian Constitution as “Israel-like steps for demographic change in Kashmir..."

बीबीसी इंडिया में एक दलित पत्रकार की आपबीती, मीना कोतवाल की जुबानी – भाग...

मुझे भी नोटिस तीन महीने पहले ही पकड़ाया गया था यानि अगर मैं सही समझ रही हूं तो पहले...

बीबीसी इंडिया में एक दलित पत्रकार की आपबीती, मीना कोतवाल की जुबानी – भाग...

और इस तरह मेरी स्टोरी इन दोनों के बीच में ही झूलती रहती, जैसे सरकारी ऑफिस में एक फाइल को जबरदस्ती...

बीबीसी इंडिया में एक दलित पत्रकार की आपबीती, मीना कोतवाल की जुबानी – भाग...

कई लोग ऑफिस में ही पूछते थे कि मैं इतनी चुप क्यों रहती हूं. मैं खुद को ही जवाब देती कि जिसके अंदर एक बवंडर चल रहा हो वो बाहर से शांत ही रहते हैं.

कश्मीर में हिंदुस्तानी औपनिवेशिक कब्ज़े की परियोजना ने लिया भयावह रूप

कश्मीर में पिछले 72 वर्षों से चले आ रहे हिंदुस्तानी औपनिवेशिक कब्ज़े की परियोजना ने 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 को खत्म करने के साथ ही एक विध्वंसक नया मोड़ ले लिया. हिंदुस्तानी हुकूमत की दीर्घकालिक परियोजना कश्मीर को एक हिन्दू-बहुसंख्यक राज्य में तब्दील करने की है.

बीबीसी इंडिया में एक दलित पत्रकार की आपबीती, मीना कोतवाल की जुबानी- भाग 7

हां, मैं उन वज़हों से परेशान हो गई थी, शायद बहुत ज्यादा परेशान. कोई किसी के बारे में ऐसे कैसे लिख...

बीबीसी इंडिया में एक दलित पत्रकार की आपबीती, मीना कोतवाल की जुबानी – भाग...

मैंने दलितों और वंचितों पर उनके कई आर्टिकल देखे हैं. सोशल मीडिया पर भी वे वंचितों की आवाज़ बन कर कई मुद्दों पर लिखते रहते हैं. लेकिन जो सब वो लिखते थे और जैसा मैं उन्हें जान पा रही थी, वो उससे बिल्कुल मेल नहीं खा रहे थे.

बीबीसी इंडिया में एक दलित पत्रकार की आपबीती, मीना कोतवाल की जुबानी – भाग...

मैं अक्सर देखती थी कि जिस स्टोरी के आगे मेरा नाम लिखा होता था उसे सीरियसली नहीं लिया जाता था. क्या ये मेरा वहम था! इसकी पुष्टि के लिए मैंने एक बार फिर अपनी एक सहकर्मी से ट्रांसलेट की हुई कॉपी चेक करवाई तभी उसे आगे बढ़ाया, लेकिन उस बार भी मुझे निराशा ही हाथ लगी.